जंतर-मंतर पहुंचे कर्जदार किसानों के अनाथ बच्चे, सरकार से लगाई गुहार

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“घर की बुनियादें दीवारें बामोदर थे बाबूजी

सबको बांधे रखने वाले एक हुनर थे बाबूजी”

इन लाइनों में बाबूजी यानि पिता के न रहने का जो दर्द है, वो जंतर-मंतर पहुंचे उन बच्चों की आंखों में भी दिखा जिन्होंने कर्ज से दबे अपने किसान पिता को खो दिया है. जंतर-मंतर पर किसानों के ऐसे चालीस बच्चे जुटे जिनके पिता अलग-अलग वक्त पर महाराष्ट्र में खुदकुशी कर चुके हैं क्योंकि खेती में नुकसान होने की वजह से वो कर्ज नहीं चुका पा रहे थे और परेशान होकर उन्होंने मौत को गले लगाने का रास्ता चुना.
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